जाटव समाज ने इस परम्परा का किया घोर विरोध भेदभाव बर्दाश्त नहीं

बरेली। भारत ने संविधान लागू होने के दिन से बेशक छुआछूत का कानूनी तौर पर अंत कर दिया है और छुआछूत रोकने के लिए बेशक देश में सिविल राइट्स एक्ट है, लेकिन मानव को मानव के बराबर समझने की चेतना और समझदारी तो समाज को खुद विकसित करनी होगी। अफसोस की बात है कि ये समझदारी अब तक विकसित नहीं हुई है भारतीय समाज कई मामलों मे आदिम युग में ही जी रहा है, क्योंकि समाज ऐसी धारणाओं से मुक्त नहीं हो पा रहा है कि कुछ लोग शुद्ध हैं और कुछ अशुद्ध हैं। 
ऐसा ही एक मामला प्रकाश मे आया है जनपद बरेली की आंवला तहसील मे इस्माइलपुर नाम का गांव है जो आज भी डिजिटल भारत मे पुरानी परम्पराओं से घिरा हुआ है 
मिली जानकारी के अनुसार आपको बता दें बुधवार को इस्माइलपुर गांव के मुनीश महेश्वरी के बेटे की शादी थी जिसमें उन्होंने गांव के सर्व समाज के लोगों को भोज (दावत ) पर बुलाया शाम को गांव के सभी जातियों के लोग खाना खाकर चले गये उसके उपरांत उन्होंने जाटव समाज के लोगों को चलकर खाने के लिये कहा तो समस्त जाटव समाज के लोग भड़क गये और उनके यहां भोजन करने से साफ मना कर दिया जब मुनीश महेश्वरी ने सभी जाटव समाज के लोगों से उनके यहां दावत न खाने की वजह पूछी तो जाटव समाज के लोगों ने बेहद नाराजगी के साथ कहा उनके साथ भेदभाव किया गया आज के समय कोई किसी के खाने का भूखा नहीं आपने सर्व समाज को एक साथ भोज कराया और अन्त मे जाटव समाज को चलकर खाने को कह रहे हो जाटव समाज ने उनके यहां भोजन करने से साफ इंकार कर दिया जाटव समाज की बात सुनकर मुनीश महेश्वरी ने अपने इस कृत्य की जाटव समाज से माफी मांगी और भविष्य मे ऐसा दुर्व्यवहार न करने के साथ पूरे जाटव समाज मनाकर अपने यहां भोजन कराने ले गये । 
जाटव समाज के भैंरोप्रसाद, कालीचरन, नरेश पाल,सेवाराम, रामपाल, नेकपाल,रामसरन, रामाशंकर, रामप्रसाद, राजपाल,छोटेलाल, आदि ने गांव मे उच्च जाति के यहां दावत (भोज) मे सबसे बाद मे बुलाये जाने वाली अब तक चली आ रही पुरानी परम्परा का विरोध किया साथ ही कहा हम ऐसी दावत का बहिस्कार करते हैं भविष्य मे सबसे बाद मे भोजन कराने के उद्देश्य से जाटव समाज को खाने पर (दावत) मे न बुलाये। 
जाटव समाज के उपर्युक्त लोगों ने बताया इसी तरह भेदभाव के चलते गांव मे धार्मिक कथा का आयोजन किया जाता है जिसमें सर्व समाज की कन्याओं को फेरी कलश उठाने के लिए रखा जाता है जाटव समाज की किसी बेटी को कलश यात्रा मे शामिल नहीं किया जाता क्या हमारी बहन बेटी ,बहन बेटी नहीं इसी कृत्य को लेकर भविष्य होने बाली धार्मिक कथा को चन्दा भी न देने की बात कही जाटव समाज के लोगो ने कहा सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा।

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