आसफपुर क्षेत्र में डेंगू ने मचाया कोहराम 80 प्रतिशत से ज्यादा घरों में डेंगू के रोगी, झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से हो रही मौतें
बदायूं। आसफपुर क्षेत्र में इन दिनों जानलेवा डेंगू ने पैर पसार लिये है, लोग दहशत में है। डेंगू से कस्बे में दो युवाओं की जान चली गयी जबकि दर्जनों मरीज आसपास के शहरों मे स्थित निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, कस्बे में स्थित सरकारी अस्पताल असहाय महसूस कर रहा है, जहां न डाक्टर है और न ही चिकित्सीय सुबिधायें, मच्छरों के मारने को दवाओं का छिड़काव भी नही किया गया है। बीते लगभग एक पखवाड़े से कस्वा सहित क्षेत्र के ग्राम भूड़बिसौली, तखौरा, सीकरी,दुन्दपुर, नूरनगर कौड़िया आदि दर्जन भर से ज्यादा ग्रामो में बुखार का प्रकोप बढ़ गया है। हर घर मे कोई न कोई सदस्य बुखार से पीड़ित हैं, सरकारी अस्पताल में कोई सुविधा न होने से झोलाछाप डाक्टरों की दुकानों पर भारी भीड़ लग रही है। लगातार दवा खाने के बाद भी बुखार में कोई सुधार नहीं होने के बाद लोग बिसौली, चंदौसी, मुरादाबाद और बरेली के निजी अस्पतालों में शरण ले रहे हैं, जहां अस्पताल प्रशासन ज्यादातर मरीजो में डेंगू के लक्षण होने की पुष्टि कर रहे हैं। कस्बा निवासी पवन मिश्रा और गोविन्द मिश्रा, अर्जुन शर्मा ,अनमोल कटिया, को डेंगू की पुष्टि हुई है। पवन ,अर्जुन ,गोविन्द तीनों का इलाज बिसौली के निजी नर्सिंग होम में कराया जा रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि हर गांव में इन दिनों गंदा पानी भरा हुआ है, यही से मच्छरों की पैदावार शुरू होती है, ग्रामीणों का कहना है कि शासन स्तर से हर गांव में मच्छरों के मारने को दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए, लेकिन यह छिड़काव नही किया जा रहा है है।
इस बाबत जब आसफपुर के सीएचसी अधीक्षक डॉ.पंकज शर्मा से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बढ़ रहे ड़ेंगू के मरीजों की संख्या को देखते हुए सीएचसी पर रात और दिन खून की जांच एवं मरीजो के इलाज की व्यवस्था की गई है, वही किसी भी समय आपातकाल में निशुल्क 108 एम्बुलेंस की सेवा ली जा सकती है, उन्होंने बताया कि ऐसे गंभीर मरीजों को भर्ती के लिए 24 घन्टे सेवा व्यवस्था की गई है, उन्होंने यह भी बताया कि गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस द्वारा जिला मुख्यालय पर स्थित राजकीय मेडिकल कालेज भेजने की व्यबस्था भी की जायेगी, डॉ.पंकज शर्मा ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि सेवा को व्यवसाय समझने वाले नीम हकीम के पास ऐसे मरीज को न ले जाये, जिससे जान का खतरा बढ़ सकता है।
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