भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुआ कटरी हत्याकांड के मृतकों का अंतिम संस्कार

आदित्य भारद्वाज, सूर्य टाइम्स न्यूज
बरेली। बीते बुधवार को गंगा की कटरी में हुए ट्रिपल मर्डर के मृतकों का शनिवार को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया जबकि मृतकों के परिजन शवों को पंजाब ले जाना चाहते थे परंतु प्रशासन ने शवों को जनपद से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी। ‌‌‌
मृतक देवेंद्र के पिता परमवीर व परविंदर के पिता दलजीत सिंह बरेली से शवों को पंजाब ले जाने आए थे और शुक्रवार को वहां अंत्येष्टि की पूरी तैयारी होने के बाद तमाम रिश्तेदार जुट चुके थे लेकिन शासन द्वारा बवाल की आशंका के चलते परमिशन ना दिए जाने से शवों को पोस्टमार्टम हाउस के डीप फ्रीजर में ही रखवा दिया गया था और परमवीर ने भी अन्य परिजनों व रिश्तेदारों को फरीदपुर ही बुला लिया जहां कटरी के फार्म हाउस में स्थित सच की खोज एकेडमी परिसर को छावनी में तब्दील कर शनिवार दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर अंतिम संस्कार हुआ, जिसमें मृतक परविंदर के माता-पिता व बहन चंडीगढ़ से आ गए जिनका रो रो कर बुरा हाल था परंतु मृतक देवेंद्र के परिवार से कोई नहीं पहुंच पाया इसलिए परविंदर को पिता दलजीत सिंह व देवेंद्र को एकेडमी के संस्थापक धर्म सिंह बापूजी ने मुखाग्नि दी।
अब हम आपको बताते हैं कि कैसे हुई कटरी में फार्म हाउसों की स्थापना :-
जनपद बरेली बदायूं की सीमा पर रामगंगा नदी के किनारे बसे आंवला के गांव फिरोजपुर में लगभग 20 वर्ष पहले कटरी की उबड़ खाबड़ बंजर जमीन से शुरू हुई थी फार्म हाउसों की प्रक्रिया जहां बरेली निवासी सीएल शर्मा ने फिरोजपुर के नजदीक तकरीबन 300 बीघा जमीन पर पहला झाला बनाया जिसे बाद में उन्होंने पंजाब के एक फौजी को बेच दिया जिसके पास ही आज गौतम बुद्ध महाविद्यालय फिरोजपुर नाम से डिग्री कॉलेज है।
समाजवादी पार्टी की सरकार में रामगंगा चौबारी पुल से फिरोजपुर, हिम्मतपुर, रुकुमपुर होते हुए बदायूं तक एक बांध का निर्माण कराया गया था जिसकी लंबाई लगभग 20 किलोमीटर है। इसी क्रम में आपको बताते चलें कि ग्राम पंचायत तजपुरा नवदिया के पास सिकरोड़ी नामक एक गांव हुआ करता था, जिसमें ग्राम सभा और सरकारी भूमि लगभग हजारों बीघा थी उसमें समाजवादी पार्टी सरकार में तत्कालीन राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव के माध्यम से यहां लाखों की संख्या में सरकारी पौधारोपण कराया गया था जिसे उन्होंने रामगंगा हरित पटटी नाम दिया था और आज भी लाखों की तादाद में यहां वृक्ष लगे हुए हैं। 
आसपास के ग्रामीणों के अनुसार कटरी की जमीन को उपजाऊ सरदारों ने ही बनाया है। शनिवार को जहां मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया उसके आसपास कुछ झाले आगरा वालों के भी हैं। यहां हरे कृष्णा ट्रस्ट अनूप सिंह के संरक्षण में है और यहीं ओमप्रकाश चौधरी व ताराचंद्र शर्मा का भी फार्म हाउस है।
साथ ही वर्ष 2007 में सीएल शर्मा, वर्ष 2009 में जय भगवान राणा, 3 नवंबर 2013 को ओम प्रकाश, वर्ष 2016 में रविंदर यादव का झाला बना था और 2017 में परमवीर की एकेडमी बनी इसके बाद पिछले वर्ष 2022 में गुर्जर फार्म हाउस नाम का एक झाला और बना।
ट्रिपल मर्डर केस का मामला भी कहीं ना कहीं सरकारी जमीन से संबंधित ही है जहां आज भू माफियाओं का अवैध कब्जा है और भू माफियाओं ने सरकारी जमीन के छोटे छोटे खेतों पर कब्जा कर 60 किलो प्रति बीघा फसल के हिसाब से आसपास के ही किसानों को दे रखा है। बताते चलें कि कटरी में बनी एकेडमी के दोनों और भी भूमि पर वन विभाग के सरकारी बोर्ड लगे हुए हैं। साथ ही आपने देखा ही है कि उस 135 बीघा भूमि जिस पर सरदार परमवीर और सुरेश प्रधान दोनों की दावेदारी किया करते थे उसी ने तिहरे हत्याकांड का खूनी संघर्ष करा दिया।

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