समाज में जागरुकता लाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है ह्यूमन चेन और वन टीचर वन कॉल मूवमेंट समग्र सामर्थ्य : डॉ.उजमा क़मर
बरेली। समग्र सामर्थ्य का अर्थ होता है सब तरह की शक्ति से भरा हुआ। एक अध्यापक को समाज आज भी उसी रूप में देखता है। जब सरकार इन्क्लूसिव एजुकेशन यानी समेकित शिक्षा की बात करती है तब अध्यापक से ये उम्मीद करती है की वह हर तरह के बच्चों को शिक्षित कर पाएं। इसमें दिव्यांग बच्चे भी शामिल हैं। दिव्यांग बच्चे यानि विशेष बच्चे। विशेष बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने के लिए आवश्यकता होती है विशेष शिक्षा की। दुर्भाग्य से हमारे साथ सारे शिक्षक शिक्षिकाएं विशेष शिक्षा के प्रशिक्षण से वंचित हैं, लेकिन दिव्यांग बच्चों और उनके माता पिता के अनुरोध पर कई शिक्षक शिक्षिकाओं को ये कमी महसूस हुई और उन्होंने सोचा कि उनके लिए कार्य के साथ साथ ये विशेष प्रशिक्षण जिसमें प्रैक्टिकल नॉलेज की बहुत जरूरत होती है, ले पाना असम्भव सा है। ऐसे में ह्यूमन चेन और वन टीचर वन कॉल की पहल जिसमें सरकारी एवं गैर सरकारी शिक्षक शिक्षिकाओं व माता पिता को इस प्रकार का प्रशिक्षण देने की कोशिश कर रहे हैं जिससे वे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति जागरूक हों और संवेदनशील बने तथा वो उसमें कम से कम ये जान सकें कि कहीं उनका शोषण तो नहीं हो रहा है। किस तरह के इलाज की उनको आवश्यकता है किस तरह की शिक्षा की उनको आवश्यकता है ये सब जानने के लिए समग्र सामर्थ्य कोर्स चलाया जा रहा है।
इसकी 20 कड़ियां पहले भी पूरी हो चुकी हैं और दुबारा समग्र सामर्थ्य 2 के नाम से ये कोर्स 26 फरवरी से पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। इसमें डॉक्टर उजमा क़मर जोकि एक विशेष शिक्षक होने के साथ साथ एक मनोवैज्ञानिक भी हैं और उन्होंने फिजियोथेरेपी का प्रशिक्षण भी लिया है उनका अनुभव इन बच्चों के साथ लगभग 15 साल का है। डॉक्टर उजमा क़मर द्वारा ये ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण लगभग 1800 से ज्यादा शिक्षक शिक्षिकाओं व माता पिता परिजनों को दिया जा चुका है। अपने अनुभव के आधार पर वह सभी तरह की दिव्यांगताओं के बारे में लोगों को जागरूक करती हैं तथा उनके साथ कैसे डील किया जाये, कैसे उनको इलाज दिलवाया जाए, कैसे उनका दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया जाए और कैसे उन्हें थेरेपी दी जाए इसके बारे में बताती हैं।
दीपमाला पांडेय जोकि वन टीचर वन कॉल के जरिए बच्चों तक पहुंचती हैं शिक्षक शिक्षिकाओं तक पहुंचती हैं वह इस कार्य को आगे बढ़ाने एवं जन जन तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस तरह ह्यूमन चेन और वन टीचर वन कॉल के इस मूवमेंट द्वारा ये कोर्स समाज में जागरुकता लाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है। डॉक्टर उजमा क़मर जोकि इसकी मुख्य सूत्रधार हैं उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और स्पाइसिक सोसायटी ऑफ नॉर्दन इंडिया से इस तरह के बच्चों को कैसे उपचार दिया जाये, कैसे उनका पुनर्वास किया जाए इसमें विशेषज्ञता हासिल की है। डॉक्टर उजमा क़मर इस समय दक्षिणी भारत के कुछ विद्यालयों और संस्थानों से जुड़कर जागरुकता फैलाने और लोगों को संवेदनशील करने का कार्य कर रही हैं। इसी श्रृंखला में जब तक उत्तर प्रदेश का हर वो व्यक्ति जो किसी न किसी रूप में दिव्यांगजनों से जुड़ा है वो प्रशिक्षित नहीं हो जाता या जागरूक नहीं हो जाता ये मुहिम नहीं रुकेगी और ये निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
इसमें कार्यशालाओ के अलावा लोगों को अलग अलग तरह से प्रशिक्षण देने के अलावा विभिन्न हेल्पलाइनों और सस्थानों से जोड़ने का कार्य भी किया जाएगा। जहां जागरुकता की कमी के रहते सरकारी व गैर सरकारी योजनाओं जैसे की दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाना अलग अलग तरह की सुविधाएं जो सरकार द्वारा दी जा रही हैं उनके बारे में जागरूक करने का कार्य विशेष रूप से किया जाएगा और युवाओं को प्रेरित किया जायेगा कि वे इस क्षेत्र में आगे बढ़ें व इस क्षेत्र में अपना कैरियर बनाएं और दिव्यांगों की सहायता करें क्योंकि वे भी हमारे समाज का एक अभिन्न अंग हैं। पिछले एक साल से ये कोर्स बिल्कुल फ्री चल रहा है।
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