कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता हांसिल कर अपना राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध करने के फिराक मे हैं - विनय सिंह
बहराइच- अखिल भारतीय गौरवशालीक्षत्रिय महासभा फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ठाकुर विनय सिंह ने कहा है कि कुछ लोग अगडे, पिछडे ऊँच नीच जैसे संकीर्ण व घृणित मानसिकता के तहत देश व समाज में इंसान और इंसान के बीच गहरी खाई खोदने का कुचक्र रचकर सस्ती लोकप्रियता हासिल कर अपना राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध करने के फिराक मे है! वे जिस रामचरितमानस मे ठोल गंवार शूद्र पशु नारी, सदा ताडना के अधिकारी! पर बहस छेड़ रखे हैं! उन्हे यह नही मालूम कि ताडना का अर्थ है कि हमेशा उन्हे ताडे रहना यानी उनको कभी नजरंदाज न करना बल्कि उनको हमेशा देखते रहना व देखभाल करते रहना है न कि ताडना का मतलब प्रताड़ित अथवा उत्पीडन करना है! उन्होंने कहा कि ऐसे समाज तोडको को उसी रामचरितमानस मे क्या यह नही दिखा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने निषाद राज केवट,भील ,कोल ,किरात,रीछ ,बंदर, गिद्ध, गिलहरी आदि को अपनाकर मित्रवत गले लगाया ही नही बल्कि उन्हें युगों युगों तक अजर व अमर किया है! साथ ही शेबरी के जूठे बेर और विदुर का साग खाकर सामाजिक समरसता को उच्च एवं महत्वपूर्ण प्राथमिकता दिया था! उन्होंने कहा कि शूद्र कोई जाति विशेष से नहीं बल्कि लोग कर्म से शूद्र होते है! उन्होंने कहा कि क्या हम महर्षि वाल्मीकि, संत रविदास, ऊदा देवी, झलकारीबाई, सरदार पटेल,लखन पासी बिजली पासी सूर, कबीर ,रहीम , पलटू दास, जगजीवन दास आदि महान संतों, महानायको को अपनी अंतरात्मा से शूद्र कह सकते हैं! कत्तई नही, उन्होंने बताया कि यह सब चुनावी हथकंडे हैं जिनसे हम सभी को सतर्क व होंशियार रहना होगा! ताकि देश व समाज में जहर घोल कर अपना उल्लू सीधा करने वा लोगों के मंसूबे को असफल किया जा सके।
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