शिक्षा के अंधाधुंध व्यवसायीकरण के साथ-साथ माता-पिता की होड़़ भी दोषी :- डॉ.उज़मा कमर
फैशन के दौर के रहते, शिक्षा भी इससे अनछुई नहीं रह गई है कहीं एक ओर माता-पिता अपनी महत्वाकांक्षाओं के रहते बिना जाँचे परखें बच्चों को नामचीन विद्यालयों में डाल रहें हैं वहीं दूसरी ओर पड़ोसी और रिश्तेदारों की होड़, ऐसे में केवल बच्चा ही दुष्परिणाम भुगतता है।
दुर्गानगर बरेली में हुई घटना जहाँ एक तरफ प्रबंधन एवं विद्यालय कार्यकारिणी को पूर्ण रूपेण दोषी ठहराती है, वहीं माता-पिता को भी सचेत करती है कि विद्यालय की गतिविधियों शिक्षक-शिक्षिकाओं के व्यवहार व कर्मचारियों के आचरण से भी अवगत रहें ।
समय-समय पर विद्यालय में संपर्क करें, शिक्षक अभिभावक मीटिंग्स में जरूर जायें अपनी जेब देखकर ही विद्यालय का चुनाव करें एवं अगर किसी कारणवश समय से शुल्क नहीं दे पा रहें हैं तो विद्यालय में सूचित करें। हम सबको सरकारी संस्थानों की ओर भी अपना ध्यान ले जाना होगा, जहाँ दिन प्रतिदिन शिक्षक नवाचार कर रहे हैं एवं अच्छी सरकारी योजनायें भी आ रही हैं। दोषी प्रबंधन को सज़ा मिलने के साथ-साथ माता-पिता, अभिभावक जनों का जागरूक और सचेत रहना भी बालक के कोमल मन को अवसाद ग्रसित होने एवं आत्म हत्या, नशाखोरी जैसी चीजों से दूर रख सकता है।
- डॉ.उज़मा कमर, मनोवैज्ञानिक काउंसलर (बरेली)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें