कांग्रेस नेता विनय सिंह ने आओ बलिदानियों से सीखे पर आधारित जन संकल्प गोष्ठी का आयोजन किया

सतीश चन्द्र त्रिपाठी, सूर्य टाइम्स न्यूज
बहराइच- भारत देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान क्रांतिकारी मंगल पांडे जी के 164वें बलिदान दिवस पर जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन श्री विष्णु कुमार यादव के संयोजकत्व मे आयोजित आओ बलिदानियों से सीखें पर आधारित जनसंकल्प गोष्ठी का वरिष्ठ कांग्रेस नेता विनय सिंह की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें उपस्थित कांग्रेस जनों ने अमर शहीद मंगल पाण्डेय जी के बलिदान दिवस के साथ साथ बांग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राष्ट्र गीत वन्देमातरम् के रचयिता रहे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि पर ध्वज रक्षक श्री रमेश चन्द्र मिश्र जिलाध्यक्ष कांग्रेस सेवादल के साथ वंदेमातरम का गायन करके राष्ट्र ध्वज तिरंगे को सामूहिक रूप से शैल्यूट देकर देश व समाज के हितार्थ प्रतिज्ञा दोहराई! उक्त अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता जगदीश सिंह जी का सम्मान भी किया गया! गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस नेता विनय सिंह ने कहा सन् 1857में भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की महान क्रांति का बिगुल वीर भारतीय योद्धा मंगल पाण्डेय ने बजाकर अंग्रेजी अधिकारी लेफ्टिनेंट हेनरी बाग की नींद हराम कर दी थी!8अप्रैल 1857 को शहीद मंगल पाण्डेय जी के फांसी की खबर देश के कोने कोने में आग की तरह फैल गई थी जिससे लाखों भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के लिए कमर कस ली थी जिसका परिणाम 3एल सी परेड में 90 भारतीय घुड़सवार सैनिकों में से 85सैनिकों ने कारतूस लेने से मनाकर आर पार का विद्रोह का ऐलान कर दिया था! अंग्रेजी आफिसर ह्यूस्टन व हेनरी बाग को तो मंगल पाण्डेय जी ने ही मौत के घाट उतार दिया था। बाद में अन्य विद्रोही सैनिकों ने बगावत का बिगुल फूंककर सशस्त्र सेना कूच कर दिल्ली पहुँच गए और सम्पूर्ण रेजिमेंट ने खुला सैनिक विद्रोह कर दिया था! उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् के लेखक तथा महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय जी की पुण्यतिथि है जिन्होंने कहा था कि हर जवानों के गले का हार वंदेमातरम, छीन सकती है नही सरकार वंदेमातरम!! जो आज भी अजर व अमर है! इस अवसर पर सभी लोगों ने दोनों महान विभूतियों को नमन करते हुए उनके कृतित्व एवं ब्यक्तित्व पर प्रकाश डाला! गोष्ठी में मूलचन्द राव, इशारत खान, अवधराथ पासवान, बैजनाथ चौधरी, नंद कुमार रावत सतीश सिंह रामदीन गौतम आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किये।

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