जलमग्न विद्यालय की बदली तस्वीर, ग्रामीणों की पहल से हुआ समस्या का निस्तारण
बरेली। वर्ष 2018 तक की यदि बात करें तो जनपद बरेली के विकासखंड आलमपुर जाफराबाद का उच्च प्राथमिक विद्यालय बरसात के मौसम में एक तरह से नदी में तब्दील हो जाता था जिसका मुख्य कारण यह भी है कि गांव की मुख्य सड़क, खड़ंजे व अन्य मकान ऊंचाई पर बने हुए हैं जिनसे विद्यालय काफी नीचे है और यहां से जल निकासी का कोई अन्य स्रोत भी नहीं होने से जलमग्न विद्यालय में पढ़ाई हो पाना बहुत ही कठिन था।
परंतु कहते हैं ना कि जहां चाह होती है वहां राह होती है - इसी के साथ ही विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक में स्कूल के जलभराव की समस्या को रखा गया जिसमें विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका सारिका सक्सेना की कर्मठता से प्रभावित ग्राम वासियों की पहल से इस गंभीर समस्या का निस्तारण भी हुआ।
आपको बता दें कि आज भी जहां गांव देहात में लोग खेत की मेड़, चकरोड, नाली यहां तक कि भाई भाई बंटवारे को लेकर आपस में लड़ते झगड़ते हैं वहीं पथरा गांव के ही अरुण प्रजापति ने एक ऐसी मिसाल पेश की जिससे आज और भी लोग प्रेरित होते हैं।
अरुण प्रजापति अब क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं उनका घर उच्च प्राथमिक विद्यालय के ठीक पीछे हैं और वे अपने घर से ही इंचार्ज प्रधानाध्यापिका सारिका सक्सेना की कार्यशैली व विद्यालय की गतिविधियों को देखा करते थे जिससे वे इतना प्रभावित हुए कि यदि उनके योगदान से विद्यालय की समस्या का समाधान हो सकता है तो वे हर संभव सहायता करेंगे और फिर उन्होंने अपने घर के अंदर से ही एक अंडरग्राउंड पाइप डलवाकर विद्यालय के जलभराव की समस्या को हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर दिया अब चाहे कितनी भी बारिश हो जाए लेकिन विद्यालय में एक बूंद भी पानी नहीं रुकता।
अब आप सोच रहे होंगे कि शायद अरुण प्रजापति के या फिर उनके परिवार के बच्चे इस विद्यालय में पढ़ते होंगे इसलिए उन्होंने ऐसा किया तो आप बिल्कुल गलत सोच रहे हैं क्योंकि आज तक कभी उनका कोई बच्चा उच्च प्राथमिक विद्यालय में नहीं पढ़ा वे तो विद्यालय परिवार को भी अपना परिवार और विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को अपने ही बच्चों की तरह मानते हैं।
"अरुण प्रजापति के इस योगदान के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय पथरा की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका सारिका सक्सेना, विद्यालय परिवार और विद्यालय प्रबंध समिति ने आभार व्यक्त किया।"
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